STORYMIRROR

हरीश सेठी 'झिलमिल'

Tragedy

5.0  

हरीश सेठी 'झिलमिल'

Tragedy

जीवन का अंतिम पड़ाव

जीवन का अंतिम पड़ाव

1 min
738


जीवन के

अंतिम पड़ाव पर

बैठी स्त्री

स्मरण करती है।


बार बार

बचपन से

बुढ़ापे तक का सफर

संन्यास आश्रम की

इस पगडंडी पर

अनायास ही

सजीव हो

उठते हैं।


चित्र

आँखों के सामने

पिता, पति, पुत्र

के प्रतिबंध

मीठे, खट्टे, कड़वे पल

माँ, बहन, बेटी, बहू

संग बिताया

एक-एक पल।


बूढ़ी नज़र

बीनती कंकर

वृद्ध काया

करती मूल्यांकन

जीवन में

क्या खोया

क्या पाया।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy