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Rashminder Dilawari

Abstract

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Rashminder Dilawari

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जी चाहता है

जी चाहता है

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आज फेर जी जाने को जी चाहता है

दिल के अरमान कह जाने को जी चाहता है

आज फेर जी जाने को जी चाहता है

कभी मोतियों जैसी बारिश की बूंद में,

कभी छमछमति सर्दी की धूप में,


आज फेर बतियाने को जी चाहता है

आज फेर जी जाने को जी चाहता है

नई भूलती वो बचपन की यादें हंसते,


गुनगुनते हम अपने दिन गुजारते आज

फेर बच्चा बन जाने को जी चाहता है

आज फेर जी जाने को जी चाहता है

कभी खेतो में लेहराऊँ मैं फसल सा कभी लब पे सज जाऊँ

मैं ग़ज़ल सा बन रेत बिखर जाने को जी चाहता है


आज फेर जी जाने को जी चाहता है

बंदिशों से बंधा हुआ हर वो दरवाजा खोल दूँ।

जो कभी न कहा आज वो हर

एक राज खोल दूँ क्या कहेंगे लोग ?


आज सुन जाने को जी चाहता है

आज फेर जी जाने को जी चाहता है।

उड़ जाऊँ गगन में खोल के पंख मैं सारे झूम जाऊँ मैं 

एक मस्ती में जैसे मस्त बाहारें

आज फेर सपने जी जाने को जी चाहता है


दिल के अरमान कह जाने को जी चाहता है

आज फेर जी जाने को जी चाहता है।


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