STORYMIRROR

Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Action Classics Inspirational

4  

Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Action Classics Inspirational

झूठ है

झूठ है

1 min
183

झूठ है इनकी ज़िन्दगी 

झूठे हैँ ये लोग 

पा जायें तो दाब ले 

सच्चों का सब नोट 


नोट का तो सब खेल है 

मैँ समझूँ सच् टेल 

ये तो ऐसे बदरंग हैँ 

जैसे कालिख पोत 


पढा लिखा क्या व्यर्थ है 

क्यूँ जागा मैँ लेट 

ऐसे तो होगा सही 

जैसे मालिक का पेट 


प्रतिकुलपति बन जो मिला 

कुलपति की नहीं चाह 

तीन फल कहाँ से लांउं 

दुनिया कहती वाह 


अंधी ये सब दौड है 

क्या पाया तू भाग 

थोड़ा मन की बात सुन 

धीरज गया सब मेट !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Action