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Dr J P Baghel

Tragedy

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Dr J P Baghel

Tragedy

जाग अरे !

जाग अरे !

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दिख रहे समय की आहट में बरबादी के आसार मुझे 

वे दिखा रहे हैं सपनों में रंगीनी और बहार तुझे !


चल रहे कहीं पर तीर, इशारे किए जा रहे और कहीं 

सहमी घबराई मानवता, मिलता ना सुरक्षित ठौर कहीं 

कर रही धर्म का नशा कराकर संज्ञहीन सरकार तुझे ।

दिख रहे समय की आहट में बरबादी के आसार मुझे !!


जब भी तूने रोटी मांगी कह दिया उन्होंने राम रटो

हिस्से की बात उठाई तो धकियाया कहकर दूर हटो 

जब उठी गले से चीख एक, तो बता दिया गद्दार तुझे ।

दिख रहे समय की आहट में बरबादी के आसार मुझे !!


डर और वंदनाएं उनकी, स्वर चौतरफा उनकी जय के

जग उठा दंभ, नारे उछले, बन गए घोर वाहक भय के 

उठते दिख रहे गुलामी के फिर से घनघोर गुबार मुझे ।

दिख रहे समय की आहट में बरबादी के आसार मुझे !!


हर और प्रचार झूठ का है सच बुरी तरह आतंकित है 

हे युवक, देख ! रह सावधान तू ही अब अधिक प्रवंचित है

सुन, मिला हुआ है संविधान में, जीने का अधिकार तुझे ।

दिख रहे समय की आहट में बरबादी के आसार मुझे !!


तुझको असमर्थ बनाने की उनकी कोशिश है जाग रे 

चल हुआ जरूरी आज लगा उन षडयंत्रों में आग अरे 

अब चूका तो फिर नहीं मिलेगा अवसर अगली बार तुझे ।

दिख रहे समय की आहट में बरबादी के आसार मुझे !!

वे दिखा रहे हैं सपनों में रंगीनी और बहार तुझे !!


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