इतिहास बना भी दीजिए
इतिहास बना भी दीजिए
मार्ग अब प्रशस्त है
कदम बढ़ा भी दीजिए
सोचिए ना और कुछ
इतिहास बना भी दीजिए
स्वीकारिए यथार्थ को
व्यर्थ विलाप ना कीजिए
विजय की अलाप से
जयघोष नाद फूंकिए
पथ भले पथरीले हो
साहस से काज लीजिए
पर्वत भले हठीले हो
दर्रा बना के चीरिए
वनराज खड़ा हो मार्ग में
कटार से हटाइए
लहरों की सुनामी बढ़ रही
तैर कर पार कीजिए
तूफान जो आए सामने
ज़रा ना घबराइए
कड़क रही है बिजलियाँ
अपनी गरज तो सुनाइए
आशा की मशाल से नया सवेरा लाइए
मार्ग अब प्रशस्त है
कदम बढ़ा भी दीजिए
सोचिए ना और कुछ
इतिहास बना भी दीजिए
