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Gulab Jain

Romance

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Gulab Jain

Romance

इश्क़ की महक

इश्क़ की महक

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फिर तेरे प्यार का बादल छाया

फिर कोई हसीं नग़मा याद आया।


प्यार की बारिश में भीगे थे कैसे,

फिर उन्हीं लम्हों ने दिल तड़पाया।


तेरी आँखों में झाँक कर हम ने,

अपनी ज़िन्दगी को पुर-सुकूँ पाया।


ज़िन्दगी तेरे बिना कुछ भी नहीं,

इश्क़ की महक ने हमें समझाया।


मेरी ज़िन्दगी फ़क़त स्याही थी,

तूने चाँद बनके इसे चमकाया।


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