STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Romance

4  

V. Aaradhyaa

Romance

मलंग मन

मलंग मन

1 min
304

जब बहे बसंती पवन अलसाए तन 

होली के संग बावरा हो गया ये मन,

गुझिया,वड़ा,मिठाई और ठंढाई

होली के उन्माद को बढ़ाता भंग :

मधु छात से भर गए मकरन्द

होली के गीतों में प्रेम के छंद,

पैरों की थिरकन में है जंग

मन नाचने लगा हो के मलंग :

चहु ओर सखी बाजे मृदंग

रँग से भीगे अंग अंग,

छा रहा है चतुर्दिक अनंग

फ़ैल रही मस्ती की तरंग :

यादगार बन जाए ये सारे रँग 

तरु ले उमंग ज्यों वस्त्र हुए तंग,

उद्वेलित होकर हुए अतरंग

मैं खेलूं होरी अपने साँवरे के संग!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance