एहसास ए इश्क़
एहसास ए इश्क़
नज़र से नज़र का वो एहसास है इश्क़!
गुज़रते सफर का वो एहसास है इश्क़
इश्क़ है वो लम्हा जो टल जाये इक पल में
ठहरते सफर का वो एहसास है इश्क़
इश्क़ ही तो है वो जो बसता है मुझमें
है ये वो मासूमियत जो दिखती है तुझमें
है वो लम्हा भी ये भी ये जो रुकता है मुझमें
या इबादत कहूँ इसे मै होता सजदा है जिसमें
ये मोहब्बत ही तो है वो जो गुम सा है तुझमें
नज़र से नज़र का वो एहसास है इश्क़
नज़र से नज़र का वो एहसास है इश्क़!
बिछड़ते सफर का ये एहसास है इश्क़
जो बुझती नहीं ये वो प्यास है इश्क़
गुज़रते सफर का एहसास है इश्क़
चलेंगे हम जिनपे वो रहगुज़र भी होगा
पर मंज़िल है तू वो , जिसकी इक आस है इश्क़
क्या मै महबूब , पागल या आशिक हूँ तेरा
मै हूँ धूमिल सी शामें या हूँ गहरा अंधेरा
वो अलग बात है कि
ढलेंगी हर मुश्किल होगा होगा उजला सवेरा
ना होंगी गर शामें तो बस रात है इश्क़
ठहरते सफर का वो एहसास है इश्क़
नज़र से नज़र का वो एहसास है इश्क़ !
नज़र से नज़र का वो एहसास है इश्क़
गुज़रते सफर का वो एहसास है
इश्क़ जो बुझती नहीं ये वो प्यास है इश्क़ !

