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Gulab Jain

Others

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प्रेम के फूल...

प्रेम के फूल...

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ऐसा कोई गीत सुनाओ

जीवन की इस बगिया में जो,

मधुर प्रेम के फूल खिलाए।

मेरे भारत की माटी में,

केसर और गुलाब खिलाए।


मानव को मानव से जोड़े,

वर्ण-जाति के भेद मिटाए।

मज़हब की दीवारें तोड़े,

राम-रहीम एक हो जाएँ।

यह अशांत जग ढूंढ रहा जो,

कोई सुन्दर राह दिखाए।


विश्व-शान्ति की परिभाषा,

जग के कण-कण को समझाए।

ऐसा कोई गीत सुनाओ,

ऐसा कोई गीत सुनाओ।


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