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Dr.rajmati Surana

Romance

4  

Dr.rajmati Surana

Romance

इश्क का रंग

इश्क का रंग

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इश्क का रंग कैसा होगा हमने कभी सोचा न था,

हरा होगा पीला नीला आसमानी गुलाबी सोचा न था।


इश्क कहाँ देखता है रंग रूप को वो काला है गोरा,

सतरंगी इश्क हमसे इतने गुनाह करवायेगा सोचा न था।


राधा को भी बहुत पसंद था कान्हा का साँवला रंग,

साँवला रंग इतने दिलों को जीत लेगा कभी सोचा न था।


कल्पना के अनगिनत अहसासों के रंग से खिलता है प्यार,

इश्क के लाल रंग में हम रंग जायेंगे हमने कभी सोचा न था।


मिलते हैं जब प्यार से हमसे तो जिदंगी रंगीन हो जाती हैं,

जिदंगी के रंग इतने खुबसूरत होते हैं ये हमने कभी सोचा न था।


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