इश्क का रंग
इश्क का रंग
इश्क का रंग कैसा होगा हमने कभी सोचा न था,
हरा होगा पीला नीला आसमानी गुलाबी सोचा न था।
इश्क कहाँ देखता है रंग रूप को वो काला है गोरा,
सतरंगी इश्क हमसे इतने गुनाह करवायेगा सोचा न था।
राधा को भी बहुत पसंद था कान्हा का साँवला रंग,
साँवला रंग इतने दिलों को जीत लेगा कभी सोचा न था।
कल्पना के अनगिनत अहसासों के रंग से खिलता है प्यार,
इश्क के लाल रंग में हम रंग जायेंगे हमने कभी सोचा न था।
मिलते हैं जब प्यार से हमसे तो जिदंगी रंगीन हो जाती हैं,
जिदंगी के रंग इतने खुबसूरत होते हैं ये हमने कभी सोचा न था।

