STORYMIRROR

Dr.rajmati Surana

Abstract

3  

Dr.rajmati Surana

Abstract

बिखर गए हैं हम

बिखर गए हैं हम

1 min
658

बिखर गए हैं हम

ईश्वर हमें तेरी पनाह में रखना

खो गये हम ना जाने कहाँ

हम पर वरद हस्त रखना।


दूर तलक छाई वीरानगी

उम्मीदों के मंज़र है बिखरे

मंजिलों का ना रहा कोई पता 

गुमनाम हो जाऊं ऐसी कृपादृष्टि रखना।


परिंदो की चहक जब सुनी तो

दिल को बडा सुकून सा मिला 

कफस बन कर रह गई है जिदंगी 

जिदंगी को कैद से आजाद रखना।


हे भगवन् जब भी तुझे पुकारूँ 

मैं फरियाद ले तेरी चौखट पर आऊँ 

नादान हूँ मेरी अरदास कबूल कर 

हर लम्हा मुझे तू बस महफ़ूज रखना।


बिखर गए हैं हम

ईश्वर हमें तेरी पनाह में रखना।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract