STORYMIRROR

Dr.rajmati Surana

Tragedy

3  

Dr.rajmati Surana

Tragedy

सड़क

सड़क

1 min
371

मैं सड़क आज कितनी तन्हा हो गई हूँ

ना कदमों की आहट तो व्यथित हो गई हूँ।


दर्द से कांप उठती थी पहले आहट से मैं,

पदचिन्हों वाहनों की आवाज़ अब भूल गईं हूँ।


बहुत गुरूर था यारों मुझे सड़क होने पर,

ख़ुदा ये कैसी छाई वीरानी परेशान हो गई हूँ।


दुनियाँ की गन्दगी से मेरा दामन कभी बेदाग हुआ,

सब बेसफर हो गये जिंदगी के रंगों को भूल गई हूँ।


आज इस दुनियाँ की बीमारी से हर शख्स टूट गया,

सबके कदमों की आहट को सुनने के लिए

व्याकुल हो गई हूँ ।


सैकड़ों वाहनों की आवाज़ और उत्सवों की ख़ुशियाँ,

अब तो हालात ऐसे की खुद में ही सिमटने लग गई हूँ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy