STORYMIRROR

Minati Rath

Abstract

4  

Minati Rath

Abstract

पुराना कैलेंडर

पुराना कैलेंडर

1 min
398

दीवार पर लटकती पुराने कैलेंडर को

हटाते वक्त कुछ ऐसा लगा

जैसे किसी अपने को निकाल रही हूं

अपने ही घर से

वह जो साल भर दोस्त बनकर रहा

मेरी हर ज़रूरत का खयाल रखते हुए

मेरी हर एक योजना को अंजाम देते हुए

वह जो हर सुबह मुझे प्यार से देखा

दिनांक बताते हुए 

जिसकी हर संख्या में दिखती थी मुझे

कुछ उम्मीद, कुछ भरोसा

अब बदलना ही होगा उसे

एक अनजान जैसा

मेरे मन की भावनाओं को

वह तब भी समझ गई

जाते जाते भी उसने एक बात कह गई

समय के साथ बन जाता है

हर कोई पुराना

हर किसी को होता है 

एक दिन बदलना ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract