Sudhirkumarpannalal Pratibha
Abstract Inspirational
आरंभ
का
भी
अंत
होता
है
और
लेकिन
दोनों
कभी
जुड़ाव
नहीं
रिश्ता
एक
दूजे
से
विपरीत
बावजूद
के
बिना
दूसरे
अस्तित्व
होता।
सही मायने में...
प्रेम और नफरत
प्रेम को परिभ...
नजरिया
कहानी की परिभ...
यादों में ठहर...
प्रेम की पवित...
बेवजह इजहार क...
आप आजाद हो
उपजा प्रेम जो कण कण में, हर प्रश्न का फिर हल मिल जाना।। उपजा प्रेम जो कण कण में, हर प्रश्न का फिर हल मिल जाना।।
कुछ तो जादू था माँ तेरे आँचल में... कुछ तो जादू था माँ तेरे आँचल में...
संग चलता है, सुख दुख में साथ निभाता, मेरे राह के रोड़े हटा, सदा फूल बिखराता संग चलता है, सुख दुख में साथ निभाता, मेरे राह के रोड़े हटा, सदा फूल बिखराता
हर दिल में यही दुआ पले, मेरे देश, तू ऐसे ही फूले फले। हर दिल में यही दुआ पले, मेरे देश, तू ऐसे ही फूले फले।
जन-जन में जागृति ला दी, सदियों से थे यह मेरे साथी। जन-जन में जागृति ला दी, सदियों से थे यह मेरे साथी।
मेरा सफरआज भी जारी है और तब तक जारी रहेगा जब तक श्वेता की एक भी सांस बाकी है। मेरा सफरआज भी जारी है और तब तक जारी रहेगा जब तक श्वेता की एक भी सांस ब...
..तुम तो बस एक ख्याल थे जैसे कोई जादू थे तुम। ..तुम तो बस एक ख्याल थे जैसे कोई जादू थे तुम।
उस परमेश्वर को याद रखो क्युँकि यात्रा बहुत छोटी है। उस परमेश्वर को याद रखो क्युँकि यात्रा बहुत छोटी है।
खिलने दो उसे बगियाँ में। भ्रूण हत्या नहीं करवाओ।। खिलने दो उसे बगियाँ में। भ्रूण हत्या नहीं करवाओ।।
ये दुनियाँ होता है, तब जादू कोई होता है। ये दुनियाँ होता है, तब जादू कोई होता है।
यह खुदा का कोई जादू है या कोई अनकही सी कहानी है। यह खुदा का कोई जादू है या कोई अनकही सी कहानी है।
मनोरंजन और इंसान का नाता है गहरा इसके लिए जाने कितने उपाय है वह करता। मनोरंजन और इंसान का नाता है गहरा इसके लिए जाने कितने उपाय है वह करता।
दूर कहीं, अनंत यात्रा पर, वापसी जहां से नहीं होती मुमकिन ! दूर कहीं, अनंत यात्रा पर, वापसी जहां से नहीं होती मुमकिन !
तनख्वाह...? मुझे मेरी तनख्वाह से बहुत प्यार है...।। ६ ।। तनख्वाह...? मुझे मेरी तनख्वाह से बहुत प्यार है...।। ६ ।।
जादू बेशक करता हूं पर यह तो हाथ का खेल है, जिसमें पारंगत इंसान ही कहलाता जादूगर हैं। जादू बेशक करता हूं पर यह तो हाथ का खेल है, जिसमें पारंगत इंसान ही कहलाता जादू...
हौसले में होती है कमी ताकतें हैं रोकती हमें चलने से हौसले में होती है कमी ताकतें हैं रोकती हमें चलने से
यह थे बचपन के अनमोल पल सुहाने काश फिर से आएं दिल बहलाने। यह थे बचपन के अनमोल पल सुहाने काश फिर से आएं दिल बहलाने।
हर आहट पे पलट के देखना कि कहीं वो आया तो नहीं हर आहट पे पलट के देखना कि कहीं वो आया तो नहीं
अपनों से जो बैर करे, वह दुनिया से कैसे तरे। अपनों से जो बैर करे, वह दुनिया से कैसे तरे।
मैंने लगाया था एक दिन अपना सूटकेस रखे थे कुछ कपडे़, एक डायरी ,एक पेन मैंने लगाया था एक दिन अपना सूटकेस रखे थे कुछ कपडे़, एक डायरी ,एक पेन