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Anil Jaswal

Romance

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Anil Jaswal

Romance

इश्क दवा, समाज बेपरवाह

इश्क दवा, समाज बेपरवाह

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शायद इश्क उतना ही पुराना,

जितना ये जमाना,

इश्क करने के तरीके बदले,

किंतु मोल भाव जैसे के तैसे।

पुराना इश्क,


होता था शुरू आंखों से,

आंखों ही आंखों में गढ़े जाते थे किस्से,

आंखों से बात तक आने में,

लग जाते थे कई महीने,

फिर चिट्ठी पत्र तक पहुंचती थी कहीं बात,


तब जाकर समझा जाता था,

शुरू हुआ इश्क का बुखार।

उधर समाज था बहुत खडंग,

आशिक और माशुक को कहां करता था बर्दाश्त,

अगर आशिक आ जाता था कहीं हाथ,


तो फिर लात और घूसों की हो जाती थी बरसात,

लेकिन आशिक होता था ढीठ,

भलां माशूक के बिना कैसे आए नींद,

सौ यत्न लगाता,

आखिर उपर वाले की कृपा से,


कहीं मिलने में कामयाब हो जाता,

तो कहीं इश्क का सिक्का जमता,

यहां से एक नया लैला मजनू जन्म लेता,

और इश्क का इतिहास परवान चढ़ता।


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