इंतिज़ार
इंतिज़ार
एक पंछी का जोड़ा था
प्यार विश्वास से भरपूर
मतभेद लेकिन थोड़ा था ।
एक की चाह थी आसमान पाने की
एक की ख़्वाहिश आशियाँ सजाने की
कोशिश सदा करते दूजे को मनाने की ।
बहस हुई एक रोज़ इसी फ़साने की
एक उड़ गया रोष में और जोश में
दूजे ने की जिद्द वहीं ठहर जाने की ।
पहले को उम्मीद दूजा पीछे आएगा
कुछ दूर जाकर करने लगा इंतिज़ार
दूजे को विश्वास पहला लौट आएगा
इंतज़ार वो भी करता रहा इस पार ।
प्यार दोनों ही का सच्चा था
इंतज़ार का इरादा पक्का था
आख़िरी साँस तक वो इंतज़ार करते रहे
आस में जिंदा थे उम्मीद में ही मरते रहे।।

