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गीतेय जय

Romance Tragedy

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गीतेय जय

Romance Tragedy

इंतिज़ार

इंतिज़ार

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 एक पंछी का जोड़ा था

प्यार विश्वास से भरपूर

मतभेद लेकिन थोड़ा था ।


एक की चाह थी आसमान पाने की

एक की ख़्वाहिश आशियाँ सजाने की

कोशिश सदा करते दूजे को मनाने की ।


बहस हुई एक रोज़ इसी फ़साने की

एक उड़ गया रोष में और जोश में

दूजे ने की जिद्द वहीं ठहर जाने की ।


पहले को उम्मीद दूजा पीछे आएगा

कुछ दूर जाकर करने लगा इंतिज़ार

दूजे को विश्वास पहला लौट आएगा

इंतज़ार वो भी करता रहा इस पार ।


प्यार दोनों ही का सच्चा था

इंतज़ार का इरादा पक्का था

आख़िरी साँस तक वो इंतज़ार करते रहे

आस में जिंदा थे उम्मीद में ही मरते रहे।।


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