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Renu kumari

Abstract Romance Fantasy

4  

Renu kumari

Abstract Romance Fantasy

इंतज़ार

इंतज़ार

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कभी लगता है ये दुनिया सिमट जाए,
एक छोटे से कैफ़े में रंग भर जाए,
जहाँ हर कोना महके तेरे प्यार से,
और कहीं दूर तेरा दीदार हो जाए।

राहों में हर शख़्स में तेरा अक्स दिखे,
और उसी कोने में बैठे मेरा दिन ढल जाए।
तुम मुस्कुराओ, कहो वो अधूरी बातें,
और तेरे पीछे चुपचाप मेरे कदम चल जाएँ।

जानता हूँ, तेरा लौट आना अब मुमकिन नहीं,
पर सोचता हूँ, दुनिया से बगावत कर ली जाए।
ना जाने तेरा ये इश्क़ क्यों कमज़ोर कर देता है मुझे,
क्या इसी इश्क़ में खुद को बर्बाद कर लिया जाए?

ना जाने कितनी बार तुम अनजाने में पास से गुज़री होंगी,
क्यों ना उस चौराहे पे कुछ वक़्त ठहर लिया जाए।
ये हवाएँ, ये ख़ुशबू शायद मुझे बता दें,
तुम छू कर गुज़रो… और फिर साथ रह लिया जाए।


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