कलम बोलती है
कलम बोलती है
मै मेरे प्रिय कवि की प्यारी कलम हूं,
मै कवि की भावनाएं प्रकट करती हूं,
लिखी हुई रचनाओं का पाठ करा के मै,
मेरे कवि की हमेशा तारीफ कराती हूं।
श्रृंगारिक वर्णन लिखवाकर के मै,
प्रियतमा का दिल पिघला देती हूं,
प्रियतमा को प्यारभरा पत्र पढाकर मै,
उस के दिल में प्रेम ज्योत जलाती हूं।
कभी कभी निष्ठुर भी बन जाती हूं मै,
पढनेवालों की आंख से आंसु बहाती हूं,
आक्रोशभरे वर्णन लिखवाकर के मै,
देश की सल्तनत को भी हिला देती हूं।
मेरे कवि को सम्मान दिलाने के लिए मै,
कागज़ पे लिखकर खत्म हो जाती हूं,
कवि की बफादारी निभाने के लिए "मुरली",
मै हमेशा अपना बलिदान देती रही हूं।
