रिश्ते
रिश्ते
रिश्तों से लगते नहीं रिश्ते
फिर भी जुड़े रहे
देखा हूँ उखड़े पेड़ों से
पत्ते उगते हुए।।
अंधी हो चुकी आंखें
उन्हें मालूम नहीं
आँखों की किरदार जब से
दिल ने संभाली है।।
टटोल टटोल कर मैंने
अंधेरे को पहचाना
बेवफा थी जो रोशनी
ख़फ़ा भी होने लगी।।
संभल संभल कर चलना
आहिस्ता लगता उन्हें
थके कदमों को तब से
रफ़्तार सिखाता हूँ।।
मशहूर नहीं है सकता
मजबूर रहा होगा,
बेबस बचपन जिसका
बुज़ुर्ग हो गया बेवक्त ।।
बरबस मुस्कुराना तेरा
रुलाती रहेगी तुझे
हँसने या रोने से तेरा
वास्ता किसी का नहीं ।।
