सूर्योपासना का महापर्व
सूर्योपासना का महापर्व
सूर्य देव ही हैं वसुधा पर ,
जीवन के एकमात्र आधार।
सूर्योपासना सब करें सर्वदा ,
अंतर्मन से मानें हम आभार।
ऊर्जा ताप प्रकाश रूप में,
सूर्य से मां वसुंधरा है पाती।
इनके प्रभाव से वसुधा पर ,
सभी गतिविधियां हैं चल पातीं।
जंतु सीधे या प्रत्यक्ष रूप से,
पोषण पौधों से ही तो पाते हैं।
आरती पर्यावरणीय विषाक्तता,
प्राणवायु भी शुद्ध बनाते हैं।
कृतज्ञ भाव मां प्रकृति के प्रति ,
करेगा हम सब जीवों का उद्धार।
सूर्योपासना सब करें सर्वदा ,
अंतर्मन से मानें हम आभार।
विश्वामित्र कृत गायत्री मंत्र से,
आदिकाल से कीर्ति गई है गाई।
सनातनी नि:स्वार्थ परंपराएं भी ,
प्रकृति के संरक्षण हित अपनाई।
खुद का ही रक्षण राक्षसी प्रवृत्ति ,
आर्य संस्कृति में निहित है त्याग।
आनंद मिलेगा केवल तब ही जब ,
सबके प्रति आचरण में हो अनुराग।
मन की तृष्णाएं दुखों की मूल हैं,
और संतुष्टि है आनंद का आधार।
सूर्योपासना सब करें सर्वदा ,
अंतर्मन से मानें हम आभार।
स्वार्थ भाव में हम आकंठ डूब कर,
कर रहे हैं मां प्रकृति संग खिलवाड़।
प्राकृतिक आपदाएं जाग्रत करती हैं ,
नहीं लें हम कुतर्क और झूठ की आड़।
वायु वारि हूं जड़-चेतन सभी देव हैं,
अंतर्चक्षु खोल करें हम सब की परवाह।
विनाशकारी अंततः होती स्वार्थ भावना ,
और सहयोग बनाता आनंददायक राह।
पर्वत पेड़ जीव -जंतु संरक्षण की शिक्षा,
वैज्ञानिकता युक्त सतत् देते रहते त्यौहार।
सूर्योपासना सब करें सर्वदा ,
अंतर्मन से मानें हम आभार।
सूर्य देव ही हैं वसुधा पर ,
जीवन के एकमात्र आधार।
सूर्योपासना सब करें सर्वदा ,
अंतर्मन से मानें हम आभार।
