Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

Rajni Sharma

Romance


4.5  

Rajni Sharma

Romance


"इल्तिज़ा "

"इल्तिज़ा "

1 min 202 1 min 202

इतनी-सी इल्तिज़ा है प्रिये...

बेवजह ही बात को न बढ़ाया करो,

ग़र हो खता हमसे तो मेरे यारा,           

बेतकल्लुफ़ ही मान जाया करो।।

इतनी सी इल्तिज़ा हे साहेब,

बेवजह ही बात को न बढ़ाया करो।।

                 

लाल- पीले होकर मकां को,                 

नफ़रत का अखाड़ा न बनाया करो।

इतनी-सी इल्तिज़ा है जनाबे आली,

बेवज़ह बात को न बढ़ाया करो।।


निवाले से क्यों होते हो खफा,      

इसके लिए शुक्रिया अदा करो।

इतनी-सी इल्तिज़ा हे मेरी,

मुहब्बत में मान जाया करो ।।


अपनों को अपनापन दिखाया करो,

मुहब्बत को मुहब्बत से ही अदा करो।

इतनी-सी इल्तिज़ा हे मेरी प्रिये ,

बेवजह बात को न बढ़ाया करो।।


प्रिये, मुस्कुराहट को ही,

मुखड़े का नूर बनाया करो।

इतनी-सी इल्तिज़ा है मेरी ,

बेवज़ह बात को न बढ़ाया करो,

चाहत है, मेरे पास आया करो ।।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Rajni Sharma

Similar hindi poem from Romance