STORYMIRROR

Sadhna Mishra

Tragedy

3  

Sadhna Mishra

Tragedy

ईमान

ईमान

1 min
181


जिम्मेदारियों की राह पर जो चल पड़े,

देखते ही देखते शौक़ सारे खो गए।


तजुर्बा हालात से सिंदूरी लेकर बढ़े,

देखते ही देखते अश्क सारे खो गए।


लफ्जों को सहेजने जो कागज पर लगे,

श्याही बन ख्वाब सारे कागजो में खो गए।


*ईमान* की शोहरत लिए हम खड़े रहे,

हौसले राह की मुश्किलों में खो गये।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy