STORYMIRROR

Blogger Akanksha Saxena

Tragedy

4  

Blogger Akanksha Saxena

Tragedy

हूँ मैं मोहब्बत मगर...

हूँ मैं मोहब्बत मगर...

1 min
431

गुमराह है मोहब्बत

बदनाम है मोहब्बत

जिस्मों के सींकचों से 

झांकते मय के प्याले 


दुनिया में ढोल पीटते

कविता में ढोल पीटे

कहीं मातृदिवस बनाते

कहीं प्रेम दिवस मनाते


महिलाओं के ऊपर 

लाख कसीदे पढ़े जाते 

विश्व भर की करेंसी पे

बोलो क्यों मर्द ही छाये

 

महिला के गेसुओं में

काले दिन ही आये

प्रेम की परीक्षा 

महिला बलि चढ़ती 


घर समाज गृहस्थी 

महिला से ही चलती 

मर्दों ने औरत को

कितना भरमाया


उसकी शक्ति को

किसने पहिचाना....? 

एक झूठी कहानी 

महिला बनी है... 


जिस्मों पर ही

तुम्हारी मोहब्बत 

रूकी है।


जिस्मों से आगें

ग़र जो तुम देख पाते

फिर महिला को

यकीनन जान पाते

मैं पूजी गयी हूं 


मैं जलाई गयी हूं

मैं मर्दों के नीचे

धकेली गयीं हूं।


हाँ हूं मैं 'मोहब्बत' 

हाँ हूं मैं 'औरत'

सिर्फ़ हरायी 

गयी हूं !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy