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नीलम पारीक

Tragedy

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नीलम पारीक

Tragedy

हत्या

हत्या

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हत्या तो हत्या है न

चाहे जिस्म की

चाहे रूह की

या फ़िर ज़मीर की


वो गर्भ में पलता शिशु हो

या दिल पलता अरमान हो

हत्या तो हत्या ही है न

फ़िर क्यों नहीं है तय


कोई सज़ा उनके लिये

जो हैं हत्यारे

सपनों के,

ख्वाहिशों कि

अरमानों कि

हत्या तो हत्या ही है न।


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