नीलम पारीक
Tragedy
हत्या तो हत्या है न
चाहे जिस्म की
चाहे रूह की
या फ़िर ज़मीर की
वो गर्भ में पलता शिशु हो
या दिल पलता अरमान हो
हत्या तो हत्या ही है न
फ़िर क्यों नहीं है तय
कोई सज़ा उनके लिये
जो हैं हत्यारे
सपनों के,
ख्वाहिशों कि
अरमानों कि
हत्या तो हत्या ही है न।
"कल्पना" (fan...
"प्रेम"
"बचपन की ओर"
"ज़िन्दगी-इक ख...
"पैसा"
"सफ़र ज़िन्दगी ...
"जादू"
"खौफ़नाक मंज़र"
"मेरे हीरो"
मेरा परिवार
हर कोई है किसी न किसी नशे में चूर! इसकी बेड़ियों में जकड़ा हालात से मजबूर... हर कोई है किसी न किसी नशे में चूर! इसकी बेड़ियों में जकड़ा हालात से मजबूर...
चिमनियों से उगलता हुआ धुआं, यही अब तो बादल न्यारे हो गए... चिमनियों से उगलता हुआ धुआं, यही अब तो बादल न्यारे हो गए...
मलहमे इश्क से, जख्मी दिलों को, हर रोज सहलाती हूँ मैं... मलहमे इश्क से, जख्मी दिलों को, हर रोज सहलाती हूँ मैं...
बेशक़ सागर-सी गहराई है आँखों में मेरी, पर इन्हें छलकने से रोक नहीं पाऊँगी अब... बेशक़ सागर-सी गहराई है आँखों में मेरी, पर इन्हें छलकने से रोक नहीं पाऊँगी ...
जिन आँखों में हर वक्त रहती थी ख़ुशी और चमक, उन आँखों को रिमझिम बरसते हुए देखा है... जिन आँखों में हर वक्त रहती थी ख़ुशी और चमक, उन आँखों को रिमझिम बरसते हुए देखा है...
कहर तूने खुद बुलाया अपना कफ़न तू खुद ले आया... कहर तूने खुद बुलाया अपना कफ़न तू खुद ले आया...
ये नशे की आदत है धीमा जहर युवा पीढ़ी पर ढा रही है कहर... ये नशे की आदत है धीमा जहर युवा पीढ़ी पर ढा रही है कहर...
तूने मेरे सपने को तोड़कर प्यार भरे एहसासों को... तूने मेरे सपने को तोड़कर प्यार भरे एहसासों को...
मानवता हुई लापता क्या इन्सानियत भी सो गयी है। मानवता हुई लापता क्या इन्सानियत भी सो गयी है।
हादसों का सच !!! कौन कह पाता है ? खुलासे से तबियत बिगड़ जाती है यूँ भी खुलासे में सिर्फ़ ... हादसों का सच !!! कौन कह पाता है ? खुलासे से तबियत बिगड़ जाती है यूँ ...
माँ पूछो ना उस अंकल को काँपती नहीं क्या रुह उसकी, रात के सन्नाटे में कभी याद आती है जब-जब मेरी बेब... माँ पूछो ना उस अंकल को काँपती नहीं क्या रुह उसकी, रात के सन्नाटे में कभी याद आ...
सूरज की रौशनी से महरूम रहा मेरा घर, घिरा रहा अंधेरों में, जुगनुओं ने साथ निभाया, यही बहुत है... सूरज की रौशनी से महरूम रहा मेरा घर, घिरा रहा अंधेरों में, जुगनुओं ने साथ निभा...
एक नश्तर-सा मेरी आँखों में चुभता छोड़कर, तुम चले गए... एक नश्तर-सा मेरी आँखों में चुभता छोड़कर, तुम चले गए...
झूठी शान दिखावे में वो, इस धरती को तड़पाता... झूठी शान दिखावे में वो, इस धरती को तड़पाता...
सफल साधना कैसे हो जब साधक ही अधनंगा है। सफल साधना कैसे हो जब साधक ही अधनंगा है।
पाया है बुज़ुर्गों ने तज़ुर्बा अभी नया रखने लगे हैं काम वो बस अपने काम से। पाया है बुज़ुर्गों ने तज़ुर्बा अभी नया रखने लगे हैं काम वो बस अपने काम से।
झूठ का लिबास पहन कर लोग आगे बढ़ जाते हैं, सच भीड़ में तनहा होकर बे-लिबास रह जाता है... झूठ का लिबास पहन कर लोग आगे बढ़ जाते हैं, सच भीड़ में तनहा होकर बे-लिबास रह जाता...
क्या गुजरती होगी भूख पर भी जब वो कई दिनों से भूखी हड्डियों को खाती होगी ? क्या गुजरती होगी भूख पर भी जब वो कई दिनों से भूखी हड्डियों को खाती होगी ?
दिलो-दिमाग़ से तो आख़िर जुड़ी ही रहेंगीं यादें तुम्हारी... दिलो-दिमाग़ से तो आख़िर जुड़ी ही रहेंगीं यादें तुम्हारी...
जो देश को कम देशवासियों को ज्यादा चलाते हैं। जो देश को कम देशवासियों को ज्यादा चलाते हैं।