STORYMIRROR

नीलम पारीक

Tragedy

3  

नीलम पारीक

Tragedy

हत्या

हत्या

1 min
234

हत्या तो हत्या है न

चाहे जिस्म की

चाहे रूह की

या फ़िर ज़मीर की


वो गर्भ में पलता शिशु हो

या दिल पलता अरमान हो

हत्या तो हत्या ही है न

फ़िर क्यों नहीं है तय


कोई सज़ा उनके लिये

जो हैं हत्यारे

सपनों के,

ख्वाहिशों कि

अरमानों कि

हत्या तो हत्या ही है न।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy