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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Inspirational

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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Inspirational

हर दिन ही उत्सव है

हर दिन ही उत्सव है

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परिस्थिति जगह और समय के अनुसार,

मनाए जाते हैं अपने -अपने ढंग से त्योहार।

नीरसता तज मिल करते हैं सबके सब ही हंसी ठिठोली,

हर दिन ही उत्सव है भारत में मगर खास दीवाली और होली।


दूर हुई है कल की ठिठुरन शीत से सबको मिली है मुक्ति,

मन में अति उमंग है सबके ही होली है अभिव्यक्ति की युक्ति।

नव पल्लव हैं लता विटप के सुंदरता की है गठरी खोली,

हर दिन ही उत्सव है भारत में मगर खास दीवाली और होली।


परिस्थिति जगह और समय के अनुसार,

मनाए जाते हैं अपने -अपने ढंग से त्योहार।

नीरसता तज मिल करते हैं सबके सब ही हंसी ठिठोली,

हर दिन ही उत्सव है भारत में मगर खास दीवाली और होली।


यह तैयारी है नये साल की जो पंद्रह दिन में आएगा,

ऋतु परिवर्तन सूचक है शुभागमन का असीम खुशी ये लाएगा।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शुभ घड़ी में जब मातृ शक्ति जब संग में हो ली,

हर दिन ही उत्सव है भारत में मगर खास दीवाली और होली।


परिस्थिति जगह और समय के अनुसार,

मनाए जाते हैं अपने -अपने ढंग से त्योहार।

नीरसता तज मिल करते हैं सबके सब ही हंसी ठिठोली,

हर दिन ही उत्सव है भारत में मगर खास दीवाली और होली।


सामाजिक सौहार्द बनाए रखते हैं ये और भरते मन में नमी उमंग,

जलवायु क्षेत्र प्रकृति की अनुकूलता से होते हैं इनके अपने ढंग।

खुशी बांटने के रंग हैं निराले भले अलग क्षेत्र हों अलग हो बोली,

हर दिन ही उत्सव है भारत में मगर खास दीवाली और होली।


परिस्थिति जगह और समय के अनुसार,

मनाए जाते हैं अपने -अपने ढंग से त्योहार।

नीरसता तज मिल करते हैं सबके सब ही हंसी ठिठोली,

हर दिन ही उत्सव है भारत में मगर खास दीवाली और होली।


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