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Sarita Kumar

Romance

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Sarita Kumar

Romance

होली

होली

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ये दूरियां , मजबूरियां 

न‌ कर सकेंगी दूर हमको ।


लगाया था जो रंग कभी  

उसका नूर अब तक बाकी है ।


मन में है छवि तुम्हारी 

ओज उसका मुखड़े पर है ।


संग में खेले थे जो होली 

खुमार उसका अब तक है ।


खेलूं मैं क्यों गैरों के संग होली 

जब , बसेरा तुम्हारे दिल में है ।


रख लो गुलाल सीने पर जरा सा 

होली संग मेरे मना लो तुम ।


उठाओ पिचकारी खुद को भींगा लो 

मेरा भी तन मन भींग जाएगा ।


तुम यमुना पार , हूं मैं गंगा तीरे 

फिर भी मिलन हो जाएगा ।


पी लो जरा सा भांग का शर्बत

थोड़ा गुलाल लगा लो तुम ।


दर्पण में मुझको निहारो तुम 

संग मेरे होली मना लो तुम ।


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