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Sangeeta Agarwal

Fantasy Thriller

4  

Sangeeta Agarwal

Fantasy Thriller

होली के दोहे

होली के दोहे

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होली के त्यौहार में

उड़े रंग,अबीर,गुलाल,

इसी बहाने साजन ने

रंगे सजनी के गाल।


रंगे सजनी के गाल

हुई वो शर्म से लाल,

मर्यादा में रह कर खेलो

फिर क्यों होए मलाल ?


होए मलाल तब ही न

जब लांघो हदों के जाल,

रंगों के त्यौहार में तुम

क्यों बदलो रंग हज़ार ?


रंग हज़ार होते हैं,

क्या पीला, हरा, गुलाबी, लाल।

वो ही रंग बिखेरो तुम जो

मिलाए टूटे दिलों को हर साल।


हर साल आता है ये त्यौहार,

मौज,मस्ती,रंग का असीमित व्यवहार।

भर लो अपनी झोली इससे

दूर करो कटुता का व्यापार।


कटुता किसी को न फले

होते हैं सब बर्बाद।

रंगों के त्यौहार में, ले लो

प्रण, होंगे सब आबाद।


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