STORYMIRROR

बिमल तिवारी "आत्मबोध"

Romance

3  

बिमल तिवारी "आत्मबोध"

Romance

होली ग़ज़ल

होली ग़ज़ल

1 min
174

नहीं देखती ग़रीब की बात है होली

ना ही देखती अमीर की साज़ है होली


सभी को एक रंग में सराबोर कर देती,पर 

तन पर नहीं छोड़ती तनिक दाग है होली


अगर बरसों से पल रहा हैं मन में कुछ तो

रगड़कर दूर कर देती हर भाव है होली


नफ़रत हवा हो जाती है मिलकर गले सबसे

बिगड़े सभी रिश्तें बनाती चाव है होली


मुबारक़वाद सबको कि सलामत सब रहें

कराती रहें यूँ ही सबमें लगाव है होली।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance