ट्रैवेल प्रोफेशनल, स्वतंत्र विचारक ,यायावर अल्हड़ लेखक
सखी, वसंत देखो झूम रही है, पीली धूप हथेली चूम रही है। आँगन में उतरी सरस बहार, धरती भी मुस्कान बुन रह... सखी, वसंत देखो झूम रही है, पीली धूप हथेली चूम रही है। आँगन में उतरी सरस बहार, धर...
हम बजूका लेकर तेरे शहर में आए <br>लेकर नाव नदी की लहर में आए <br><br> मुहब्बत में मारे घर वाले... हम बजूका लेकर तेरे शहर में आए <br>लेकर नाव नदी की लहर में आए <br><br> मुहब...
नभचर जलचर संग छेड़े तान नभचर जलचर संग छेड़े तान
नाचे ढोल मंजीरा पे आज नाचे ढोल मंजीरा पे आज
देखते ही देखते यह साल बीत गया, देखते ही देखते यह साल बीत गया,
पुरखे जिनके सोते आ रहे हैं जमीं पे उनके नवासों के भी अब दौर आने लगे पुरखे जिनके सोते आ रहे हैं जमीं पे उनके नवासों के भी अब दौर आने लगे
कलम में कितनी ताकत हो जबान भी तेरी तीखी हो कलम में कितनी ताकत हो जबान भी तेरी तीखी हो
पिवत राम रस चढ़ी खुमारी तब जानी दुनियाँ हैं उधारी। पिवत राम रस चढ़ी खुमारी तब जानी दुनियाँ हैं उधारी।
राम में रम जाए तो, नहीं हिंसा फ़साद हैं राम के बस नाम से मिटता सभी बवाल हैं राम में रम जाए तो, नहीं हिंसा फ़साद हैं राम के बस नाम से मिटता सभी बवाल हैं
जो मिला तो जग पे फ़िदा हो जायेंगे जो मिला तो जग पे फ़िदा हो जायेंगे