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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Inspirational

"होली आई रे"

"होली आई रे"

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होली आई रेखुशियां लाई रे

रंग,गुलाल लगाओ

हर नर-नारी रे


फागुन री,

मस्ती छाई रे

होली आई रे

खुशियां लाई रे


केशु फूलों की

खिली क्यारी रे

खिलाओ,फूलों से

होली गिरधारी रे


बजने लगी

चंग शहनाई रे

गिले-शिकवे हुए दूर

होली में प्रेम जारी रे


शत्रुओं हारी रे

मित्रता लाई रे

लठमार होली लगे,

बड़ी प्यारी रे


प्राकृतिक रंगों से

खेलो होली रे

दूषित रंगों को डारी दे

होली तो सुखकारी रे


होली आई रे

मारो पिचकारी रे

आज न छोड़ो,

रंग डालो गिरधारी रे


आज होली की आवाज

बहुत ऊंची किलकारी रे

वसुधैव कुटुंबकम की,

करती होली तो तैयारी रे


होली आई रे

खुशियां लाई रे

द्वेषता के माहौल में

होली प्यार बरसाती रे



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