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OJASWINI YADAV

Tragedy Action Inspirational

4.5  

OJASWINI YADAV

Tragedy Action Inspirational

हम लड़ते रहेंगे यूँ ही !!

हम लड़ते रहेंगे यूँ ही !!

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जब उठ रही आवाज है,

 तो बरस रही है लाठीयाँ।  

क्या कसूर था उनका? 

उन बच्चों ने क्या गुनाह किया?  


आतंकवादी, चोर, भ्रष्टाचारी छुपके बैठे हैं!

कोई कार्रवाई नहीं उन पर,

फ़िर युवा क्यूँ लाठी सहते हैं?


सरकार, नेता और प्रशासन दुबके बैठे हैं, 

वो प्रश्नो से छुपके बैठे हैं!

बच्चे सड़क पर बैठे हैं, क्यों वो लाठी सहते हैं?  


असली गुनहगार AC में रह रहे, 

और भारत के युवा धूप में लाठी सह रहे।


जहाँ बरसनी चाहिए गोलियाँ वहाँ तो ज़मानत हो जाती है,  

नाबालिग कहकर दोषियों को माफ़ि मिल जाती है, 

फिर क्यों व्यवस्था छात्रों पर लाठी बरसाती है?  

क्यों उनका हक खाकर भी उनके हक को भूल जाती है?  


गरीबों की जेब खाली,

 नेता कर रहे बस अपनी झोली भारी।

नेता करते टैक्स संचित,  

फिर भी क्यों जिन हाथों में है डिग्रियाँ, वो है काम से वंचित?  

जिनकी है जेब भारी अब प्रशासन उसकी हुई ये सारी।


चारों ओर बेरोज़गारी, चंदा चोर नेता, ये सारे भ्रष्टाचारी  


क्या इस आज़ाद भारत के सपने देखकर कुछ लोग मौत की नींद सोए थे?  

क्या देश की ऐसी हालत के लिए लोग शहीद हो गए थे?  

इस देश को आजाद कराने की खातिर लोग अंग्रेजों से लड़े थे  

क्या देश ऐसी हालत के लिए वो मरे थे?  


देश को बचाने के लिए खुशी-खुशी फांसी चढ़े थे  

भूल गए उनका बलिदान, जिन्होंने दी थी अपनी जान।  

ना रहा ये अब वो हिंदुस्तान,  

बन गया है अब ये शमशान। 


 सरकार ये सारी है भ्रष्टाचारी  

चारों ओर है लाचारी , फैली है बेरोजगारी।  

युवा खाते लाठी, खाते गाली!  


नेता अनपढ़, चोर, निकम्मे!

 सारे दूसरों के हक का खाते हैं, लूट मचाते हैं, जनता को सताते हैं  

युवा को कॉकरोच बताते हैं ! 


ये आवाज नहीं किसी एक की, ये पूरे देश की ललकार है  

क्या यही लोकतंत्र, क्या यही लोकतंत्र सरकार है?  


हम नहीं चुपचाप ठहरेंगे,  

 हमारे हक की लड़ाई हम तो लड़ेंगे।

पड़ा अगर मरना तो हम मरेंगे,  

पर हम अपनी जिंद पे अड़े रहेंगे।  

हम नहीं पीछे हटेंगे ! 

हमारी लड़ाई है, हम तो लड़ेंगे 

 

निहत्थों पर लाठियाँ चलवाई गईं, 

रणनीति की सारी मर्यादाएँ भुला दी गईं ,

ये कलयुग की लड़ाई है, ये इंसाफ की लड़ाई है, ये हम सब की लड़ाई है ! 


बरसती रहे लाठियाँ, हम लाठियाँ भी सहेंगे।  

अब हम आखिरी श्वास तक लड़ेंगे!  

गिरे अगर बार-बार तो भी खड़े होते रहेंगे!

अब नहीं हम पीछे हटेंगे!!  


अब जब तलक नहीं होगा इंसाफ

जब तलक है ये साँस, 

 हम अपनी जिद पर अड़े रहेंगे, हम यहीं खड़े रहेंगे।


और कुछ नहीं तो यहीं मरे मिलेंगे!  

या तो न्याय लेंगे या दम तोड़ देंगे।  

  जब तक हमें न्याय नहीं मिलता हम न्याय के लिए लड़ते रहेंगे।  


क्योंकि मौत का अब डर नहीं,  

हमारा अब घर यहीं।  

रोक सको तो रोक लो, हद से ज्यादा क्या करोगे?  

हम खड़े रहेंगे यहीं, 

हम लड़ते रहेंगे यूँ ही !!


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