तुम...
तुम...
क्यों हो अब तक नाराज़ तुम
कैसे बताऊँ मेरे लिए हो कितने ख़ास तुम
हूँ अगर आवाज़ मैं तो हो मेरा हर अलफ़ाज़ तुम
मैं अगर संगीत हूँ कोई, तो उसको मुकम्मल करता साज़ हो तुम
छुपाकर रखूँ जिसको सारी दुनिया से
वो गहरा राज़ हो तुम
हो क्यों अब तक नाराज़ तुम
कब तक मुझसे मुँह फेरोगे
जबसे तुमने मुँह फेरा है
दिल टूट गया मेरा है,
कब तक उन टूटे हुए टुकड़ों को बिखेरोगे
कब तक मुझसे मुँह फेरोगे
दिल मेरा अब टूट गया है
जबसे तू मुझसे रूठ गया है
जबसे तेरा साथ छूट गया है
सब लुट गया है
जबसे तू रूठ गया है
हो क्यों अब तक ख़फ़ा मुझसे यूँ
किस बात की दे रहे हो सज़ा मुझे यूँ
कुछ बतलाओ तो क्या बात है
एक बार पूछो तो तुम बिन मेरे क्या हालात हैं
कुछ तो बताओ क्या बात है
तू किस बात पे इतना नाराज़ है?
ठीक है फ़िर, आज मेरी एक बात सुन लो तुम
अंधेरी मेरी पूरी काएनात तुम बिन, ये मान लो तुम
कोई गिला नहीं तुमसे गर अब तक रूठे हो तुम
पर मनाने की तुमको मेरी भी ज़िद है, ये जान लो तुम

