मुझे नहीं अब कुछ समझाना
मुझे नहीं अब कुछ समझाना
नहीं मुझे कुछ भी समझाना
नहीं समझ कोई पा रहा है बात मेरी
नहीं जानती समझाऊँ कैसे हालात मेरी
मैंने की कोशिश बहुत
कोशिश खुद को समझाने की
समझ नहीं कोई पा रहा जब
तो नहीं है अब चाह कुछ समझाने की
नहीं ग़लती इसमें किसी की कोई भी
मैं नहीं किसी को दोषी बता रही
मैं नहीं खुद को समझा पा रही
बस इसलिए मुझे नहीं कुछ समझाना
मत कुरे दो ज़ख़्म पुराने
मैं खुद मरहम लगा लूँगी
मैंने की कोशिश बहुत
मगर मैं नहीं खुद को समझा पा रही
ज़ख़्म पुराने हो गए हैं
अब थोड़े धुंधले से हो गए हैं
मत ढूँढो ना उनको अब
मिलेंगे अगर कभी तो मैं खुद मरहम लगा लूँगी
मैं तुनक जाती हूँ कुछ-कुछ बातों पे
नहीं बता पाती उन बातों को अब
नहीं समझाना अब कुछ भी
मुझे छोड़ दो मेरे हाल पे अब
बातें हो गई हैं बहुत पुरानी
नहीं मुझे अब वो समझानी
हाँ पर उन बातों से अब तक थोड़ी मुश्किल हो जाती है
पर बातें हैं वो बहुत पुरानी
नहीं मुझे अब वो समझानी
उन बातों को मत कुरेदो ना
करना है गर कुछ मेरी ख़ातिर
जब कहूँ मुझे बस थोड़ी देर
मेरे हाल पर छोड़ देना
कुछ ज़ख़्म हैं ताज़ा अब तक
मैं खुद मरहम लगा लूँगी
मैं खुद को अपनी बातें सुना लूँगी
मैं खुद मरहम लगा लूँगी
बातें हैं वो बहुत पुरानी
अब नहीं मुझे वो समझानी
नहीं समझा पा रही मैं जो
मुझे वो बातें नहीं समझानी
बातें क्योंकि वो बहुत पुरानी
मुझे नहीं अब वो समझाना...
