मैं खुद ही खुद की मंज़िल हूँ !
मैं खुद ही खुद की मंज़िल हूँ !
एक बात कहूँ
बात मेरी तुम सुनना ज़रा...
बताती हूँ मैंने क्या सीखा
बताती हूँ तुम सुनना ज़रा....
कोई तुम्हारी बात सुनेगा, सुनेगा कोई क्यों भला
साथ कोई आया था क्या, जो साथ सदा चलेगा
अरे!! चलेगा कोई क्यों भला
कोई तुम्हारा सहारा बने, बनेगा कोई क्यों भला
नहीं मैं बेचारी जो मैं सहारा लूँ किसी का, अरे, मैं बोझ किसी पर बनूँ क्यों भला
मैं खुद ही खुद की मंज़िल हूँ, मैं राह किसी की चुनूँ क्यों भला
मैं कमज़ोर थोड़ी हूँ, खुद ही अकेले चलूँगी किसी के साथ की ज़रूरत है ही क्यों भला..!
