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OJASWINI YADAV

Abstract Tragedy Inspirational

4.5  

OJASWINI YADAV

Abstract Tragedy Inspirational

क्या हम सब एक ही दुनिया में रहते हैं?

क्या हम सब एक ही दुनिया में रहते हैं?

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क्या हम सब एक ही दुनिया में रहते हैं?

तो फिर क्यों नहीं हम इस पृथ्वी को अपना घर मान लेते हैं, 

तो क्यों नहीं  हम यहाँ रहने वाले हर किसी को अपना मान लेते हैं।   


अगर हम सब एक ही दुनिया में रहते हैं,

तो क्यों ज़िंदगी की इस दौड़ में जीतने के लिए दूसरों को नीचे ढकेल देते हैं? 


अगर है यहाँ रहने वाला हर कोई अपना,

तो कैसे किसी और की मेहनत की कमाई से अपना घर चला लेते हैं? 

तो कैसे हम बेईमानी की, चोरी की,रिश्वत से आई धन राषि को रख लेते हैं? 

तो क्यों हम चंद रुपयों के लिए किसी का जीवन बेच देते हैं?


हम सब एक ही दुनिया में रहते हैं !

तो क्यों हम पैसों के लिए बेज़ुबानों को मार देते हैं? 

तो कैसे हम उन पैसों से किसी और का भविष्य चीन लेते हैं?

कैसे उन पैसों से सर्कार छोड़ो पूरी व्यवस्था ही खरीद लेते हैं? 

कैसे उन पैसों के खातिर भूल जाते हैं की उन कागज़ों की कीमत नहीं लगायी जा सकती 

जिसको तुमने तो खरीद लिया है मगर कोई उसके लिए शहीद हुआ है 


हम एक ही दुनिया में  रहते हुए भी 

कैसे किसी की सालों की मेहनत, किसी की जीवन-भर की कमाई और शायद किसी का जीवन ही छीन लेते हैं 


हम सब एक ही दुनिया में रहते हैं,

मत भूलो बच्चे हम उस भगवान के, भगवान के घर को लौट के जाएँगे,  

तब उस भगवान को क्या मुँह दिखाएँगे , क्या बताएँगे  

 अपने कर्म कब तक और किस किस से छुपाएंगे ?


क्यों लेनी हैं जान किसी की,हमारी इस दुनिया म चलो थोड़ा प्यार बाट देते हैं।  

क्यों हमारे कारण कोई निर्दोष दूषित हवा में साँस ले? 

चलो इंसानीयत के पौधे लगा देते हैं।  

चलो इस दुनिया को थोड़ा विश्वास करने लायक बना देते हैं, 

किसी के मुस्कुराने का कारन बनते हैं,

चलो इस दुनिया को रहने के काबिल बना देते हैं, 

क्यूँकि  हम सब एक ही दुनिया में रहते हैं।।


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