गुरु
गुरु
गुरु हैं राह दिखाने वाला,
सफलता तक पहुँचाने वाला।
कबी कबीर जी कह गये,
गुरु हरी से मिलवाने वाला।
गुरु का आदेश है प्रभु का संदेश,
गुरु की पूजा ही प्रभु की पूजा।
गुरु स्वयं ही प्रभु का रूप है,
गुरु से बड़ा न कोई और दूजा।
गुरु न केवल पढ़ते हैं;
वे सही राह दिखाते हैं।
भटके मन को राह दिखाते हैं,
धर्म की राह पर चलना सिखाते हैं।
न होते डॉक्टर, इंजीनियर,
न होते युवा विद्वान।
न संभव था देश कल्याण।
सब गुरु ने संभव कर दिखलाया है,
हमें गुरु ने पढ़ाया है।
गुरु का आदर, गुरु की भावते,
देता है सफलता तक जाने की शक्ति।
हरी से ही मिलवाने वाले,
सही राह दिखाने वाले।
सब गुरुओं को मेरा प्रणाम!
