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Brijlala Rohanअन्वेषी

Classics Crime Inspirational

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Classics Crime Inspirational

हम अब चुप नहीं बैठेगें

हम अब चुप नहीं बैठेगें

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सच को छिपाने के लिए !

झूठ को बताने के लिए !

न जाने तुम कहाँ तक गिरोगे ?

किस हद तक तुम हमारी हौसलों का हलाल करोगे ? 

कब तक यूं ही हमारी उम्मीदों का कत्ल करोगे ? 


तुम चाहे बना लो बनानी तुम्हें जितनी धाराएँ !

बर्बर, निरंकुश, निर्मम कानून का तुम लो सहारा !

पर भूल से भी भूल मत करना कि हम हैं लाचार, बेचारा !

जनमत की ताकत है हमारी हथेली पे !

अब तुम्हारे सामने हम नहीं झुकेंगें !


अब हम चुप नहीं बैठेंगे ! 

काले कानूनों की काली करतूतें !

मिटा मिटाती तुम्हें जितनी सबूतें ! 

पर अब हम डरने, सहमने,रुकने, झुकने वाले नहीं !


नहीं और आखिरी साँस तक नहीं झुकेंगें !

अब हम चुप

नहीं बैठेंगे !

अत्याचार-दमन का तुम थामो दामन,

सत्य-अहिंसा से हमारे लिए कोई विचार नहीं पावन। 


इस अचूक हथियार का खाली कभी जाता नहीं वार !

हो जाओ तुम होशियार।

जबतक जीएंगें अहिंसक क्रांति का बीज बोएंगें।

अब हम चुप नहीं बैठेंगे, अब हम चुप नहीं बैठेंगे।


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