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प्रीति प्रभा

Tragedy

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प्रीति प्रभा

Tragedy

हिंदी

हिंदी

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ह से हिंदी ह से ही हम

फ़िर क्यों इसे आंकते कम


अंग्रेजी नहीं आने पर आंँखें नम

हिंदी बोलने पर क्यों आती शर्म


पहचान है देश की ह से हिन्दुस्तानी 

मिटाते क्यों जा रहे है हिंदी की निशानी


स से संस्कृति है हमारी स से संसार हमारी

फ़िर भेद क्यों है जीवन में नर नारी के


अ से आज़ाद देश के हम है वासी

म से महान भ से भारत के है निवासी।


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