हिमालय पुत्र
हिमालय पुत्र
जिनके इरादे हों मजबूत
वो पत्थरों मे भी राह बना लेते हैं।
जिनकी मंजिल पर हो नजर
वो कारवां खुद ही बना लेते हैं।
आगे बढने का नाम है जिन्दगी
रुकने बाले मौत को गले लगा लेते हैं।
पत्थरों से ठोकर लगी तो है हमे
पर हम पत्थरों को भी दोस्त बना लेते हैं।
हमे दुश्मनों से क्यों कर हो गिला
जब दोस्त ही अपना दामन छुड़ा लेते हैं।
रुकावटें नाग बनकर डसते तो हैं बहुत
पर हम भी उन्हें गले का हार बना लेते हैं।
