STORYMIRROR

Jaiprakash Agrawal

Tragedy

3  

Jaiprakash Agrawal

Tragedy

यह कैसी आजादी?

यह कैसी आजादी?

1 min
255

आज दिल बहुत उदास है

आजादी की तलाश है

कहीं गुम हो गयी भारत माता

उनसे मिलने की आस है।


दीप जलने से पहले बुझ गयी

बहनों की आबरू लुट गयी

आस्था की जल गयी होली

रह गयी मिलन की प्यास है। 


इन्सान कुरबान हो गए कुर्सी के खेल में

सत्ता से उलझे जो वो डाले गए जेल में

पिंजडे से बाहर उड़ते पंक्षी 

सैयादों को आती नही रास है।


हसरतें दिल ही दिल मे रह गयीं

सपने हकीकतों में ढह गयीं

कौमी नफरतों की भीड़ में 

खो गयी रिश्तों की मिठास है। 


हर मजहब इस देश की शान है

वतन पर फिदा हर जान है

मंजिल पर बढ चले कदम 

जबतक सांस मे सांस है। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy