STORYMIRROR

Kavita Panot

Tragedy

4  

Kavita Panot

Tragedy

बदला

बदला

1 min
19

दिल में धधकती नफरतो

औऱ हिंसा की आग है।

हस नहस कर दे इन्सानियत को

ये दिल मे लगा बीमारी का वो दाग है।

प्रतिशोधो की ज्वाला में

रंगे हाथ लाल जवानों के

देखो सीमाओ पर ढेरो

बेगुनाहो की लाश है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy