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Kavita Panot

Inspirational

3  

Kavita Panot

Inspirational

बदला

बदला

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202

दिल में धधकती नफरतों

औऱ हिंसा की आग है।


टहस महस कर दे इन्सानियत को

ये दिल मे लगा बीमारी का वो दाग है।

प्रतिशोधो की ज्वाला में

रंगे हाथ लाल जवानों के


देखो सीमाओं पर ढेरों

बेगुनाहो की लाश है।


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