हौसला हो बुलंद ।।
हौसला हो बुलंद ।।
कोशिशें बहुत की मगर
कुछ कर न पाया,
फिर भी।
इतने कोशिशों के बाद भी
कभी कोशिश,
हमे हरा न पाया।।
कल फिर कोशिशें होंगी,
होगी फिर नई उमंगों के संग।
हर ठोकरों से हम सीख लेकर
बढ़ेंगे फिर एक आवेश के संग।।
राहों में कांटे भी होंगे
मगर हौसला न झुकेगा।
हर मुश्किल के आगे
इक नया सूरज उगेगा।।
कोशिशें हैं तो राहों में
उम्मीदों के दीप भी जलेंगे।
गिरकर फिर संभलेंगे हम
और सपनों को सच भी करेंगे।।
नए हौसलों के संग,
नए उजालों को लेकर।
गिरूंगा भी, मैं फिर उठूंगा भी
संकल्प की ज्वाला साथ लेकर।।
पता है,
हर ठोकरें हमें,दे जाएगी सबक,
हर दर्द भी, बन के, हमारी ताकत।
धुंध कैसे छुपाएगा , देखें,
इन सपनों के सूरज को।।
राहों में अंधेरा सही,
उम्मीद की लौ जलती रहेगी।
मेरी हर हार भी इक दिन,
मेरी जीत कहलाई जाएगी।।
बस एक कदम और बढ़ाकर,
हम खुद को फिर आज़माऊंगा।
हर मुश्किल से टकराकर,
अपनी तक़दीर हम खुद बनाऊंगा।।
