हाँ हूँ मैं लेखिका
हाँ हूँ मैं लेखिका
हाँ हूँ मैं लेखिका किसी और के लिए नहीं खुद अपने लिए।
अपने भावों को प्रकट करना शौक है,
पर जि़दगी बदले के लिए एक सोच और लेखिका होना भी जरूरी है।
बेहतरीन और मेरे भाव प्रकट करने से कोई अगल एक पल के लिए भी चुनौती स्वीकार करता है या फिर अपने जीवन में खुद परिश्रम करने की कोशिश करते हैं तो मेरे को मेरा भाव प्रकट करना अच्छा लगता है।
चाहती हूँ मैं मेरे दिल के भावों को पन्नों में ना उतार कर असली जिंदगी में उतारे और कुछ नया कर दिखाये।
हाँ हूँ मैं लेखिका, मेरा उदेश्य केवल सच्ची बातें पुरानी आदत और भारतीय संस्कृति और भाषा और सभ्यता को कायम रखना है।
हाँ हूँ मैं लेखिका किसी और के लिए नहीं खुद के लिए, अगर मेरे लेख लिखने से एक इंसान भी इंसान के काम आता है तो वो मेरा खुद का लिखना सफल परीक्षण होता है।
और तभी मै खुद को काबिल लेखिका समझती हुँ।
वरना अपने आप के लिए तो अपनी भावनाओं को सबके सामने पेश किया करती ही हूँ।
मेरे दिल के भावों को कब आवाज़ मिलेगी नही पता, पर यकिन हैं एक दिन जरूर मिलेगी और मेरे उद्देश्य भरा जीवन सफल होगा।
हाँ हूँ मैं लेखिका दुनियां कुछ भी कहे पर विश्वास है मेरे को आज नही तो कल बुलंद हौसले की उड़ान खुद भरनी है।
