STORYMIRROR

Sapna K S

Abstract

3  

Sapna K S

Abstract

हाँ... बहुत रोया था वो....

हाँ... बहुत रोया था वो....

1 min
239

छोड़ के अपने गली के छोर तक मुझे

आँसू छुपा कर बहुत रोया था वो,

रोती थी मेरी आँखों को हँसता छोड़

तड़प - तड़प के बहुत रोया था वो,


जिंदगी जीने की ख्वाहिश में,

जिंदगी को आँखों से बहुत दूर जाते देख,

सिसक -सिसक कर बहुत रोया था वो,

मिलकर हर खुशी को,

हर पल में ही सब कुछ मिटता देख

अपने आप से रूँठ कर बहुत रोया था वो,


यादों में मेरी, नहर किनारे बैठ,

आँसुओं को पानी से धोते,

खामोशी से अंदर ही अंदर चिल्लाते बहुत रोया था वो,

मुहब्बत तो थी,

मगर अब मुहब्बत की आदत को ,

अपने अंदर सिमटे बहुत रोया था वो....

हाँ बहुत रोया था वो.....



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract