STORYMIRROR

कुमार अशोक

Abstract Romance Classics

4  

कुमार अशोक

Abstract Romance Classics

हाइकु

हाइकु

1 min
373

रात अँधेरी

घनघोर निराशा

तारों-सी आशा 


झींगुर गीत

हवा सनन सन

बजा संगीत


जुगनू दीप

चम चमक चम

हारा है तम


जागा सूरज

लेकर अँगड़ाई

भोर हो आई


है झाँके छुप

पात छनके धूप

क्या नज़र है


घन घना-सा

तुम कहाँ हो स्वाति ?

चातक प्यासा


सूरज, चंदा

मिलन पर लागा

ग्रहण फंदा


बदरी की रू

दिखती वो, जो देखो

अँखियाँ सेंको


यौवन गर्मी

पिघल गए सब

अधर्मी, धर्मी


रूप दरीचा

ता पे प्रेम कंदील

हाय रे दिल !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract