गुनहगार हूँ मैं।
गुनहगार हूँ मैं।
तेरे लबों की सिमटनों, तेरी ज़ुल्फों की सरसरहटों,
तेरी मैखानी आँखों का तलबदार हूँ मैं।
तेरी अनसुनी हंसी, तेरे अनदेखे सपने,
तेरे अनछुए लम्हों का अदबगार हूँ मैं।
तेरी मासूमियत की शान में, कोई गुस्ताख़ी ना हुई हमसे,
बस इश्क़ है, तो इश्क़ का गुनहगार हूँ मैं।
मोहब्बत की बस्ती है ये,
इसकी आबोहवा का असरदार हूँ मैं।
तेरी इनायत, तेरी इबादत है आज कल यूँ,
कि तेरे हर इरादे हर फैसले पर, बेदार हूँ मैं
उस ख़ुदा के सजदे भी बाकी हैं हम पर।
तेरे दीदार के आगे, उसका गुनहगार हूँ मैं।

