गोरखपुर त्रासदी
गोरखपुर त्रासदी
होती आँधी तो थम भी जाती
पर,जैसे वो कोई तूफान था
गोरखपुर की लहरों पर वो
लाशों का,कोई उफान था,
मानवता के भगवे चोगे पर
कलंक का वो निशान था
किलकारियों वाली गोदी का
आँगन अब सुनसान था,
उन बच्चों के जीवन का ये
सफर नहीं आसान था
लाए थे वो इतनी ही साँसें
इससे घर उनका अनजान था,
राजनीती के लिए मात्र यह
एक,छोटा सा नुकसान था
बीमारी बता कप आगे बढ़ने का
उनके पैरों तले पायदान था,
धन-दौलत के ठेकेदारों को
मासूमों के,प्राणों का अनुदान था
दे आए बच्चें जहाँ साँसें अपनी
वो अस्पताल नहीं श्मशान था ।
