STORYMIRROR

Sandeep kumar Tiwari

Classics

4  

Sandeep kumar Tiwari

Classics

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
167

ग़ज़ल 


हमने  देखे  हैं  कई रंग ज़माने वाले 

हसती आँखों को, कई 'ख़्वाब' दिखाने वाले

 

सबकी दामन को कभी वो खुशियाँ भी देते

अपनी आँखों से कभी 'खून' बहाने वाले


हमसे पूछो ना कभी रात कहाँ काटी है 

कुछ तो हैं वो जो मुझे 'दिल' को लगाने वाले 


हम भी शामिल हैं उसी ही दुनिया में लोगों 

जिस में लाखों चोर हैं 'साध' कहाने वाले


अबके सावन में कहीं बाढ नहीं आ जाये

बढ़ते हैं अब लोग भी 'अश्क' बहाने वाले।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics