STORYMIRROR

Sandeep kumar Tiwari

Classics

4  

Sandeep kumar Tiwari

Classics

शबनम

शबनम

1 min
233

मेरे दिल में भी आ के रहा कीजिए,

बन के आँखों से शबनम बहा कीजिए।


ग़म से नाता मेरा दूर तक है सनम,

हम से ग़म को भी अपने बयां कीजिए।


यूँ तो माना  ये है  जिंदगी बेवफा, 

मेरी जां सबसे फिर भी वफा कीजिए।


दिल के मारे ही हैं इस शहर में सभी,  

दर्दो ग़म अपने दिल में सहा कीजिए।


देखो 'बेघर' क्या है बात सब को पता, 

फिर भी महफिल में कुछ ना कहा कीजिए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics